राम-नवमी
"खत्म हुआ इन्तज़ार
आ गया राम-नवमी का त्यौहार .
आठ दिन पहले था नवसंवत्सर ,
महा-उत्सव का अब आया अवसर ."
सभी पाठकों को राम-नवमी की हार्दिक बधाई . जैसा कि आप सभी जानते हैं कि कल चैत्र-नवरात्रि का अंतिम दिन था , और आज भगवान विष्णु के नौवें अवतार श्री राम का जन्मदिवस है .आज नवरात्र के व्रती कन्याओं को भोजन करा कर व्रत का उद्यापन करेंगे और अपने व्रत की समाप्ति के पश्चात देवी दुर्गा से आशीर्वाद की कामना करते हैं .
पर आज हम में से कुछ ही लोग राम-नवमी को उसी हर्षोल्लास से मनाते हैं जैसे कि नवरात्रि को मनाया जाता है . पता नहीं यह शर्म है , डर है या कुछ और . यह भी एक मज़ेदार संयोग है कि हमारी दोनों ही नवरात्रियों का अंत भगवान श्रीराम से जुड़ा है . चैत्र नव्ररात्रि का अंत श्रीराम के जन्मदिवस से होता है और शारदीय नवरात्रि के अंत में दशहरा आता है जो कि लंका के राक्षस राजा रावण पर राम की विजय का उत्सव है .
समाज में जिस प्रकार पाप का विस्तार और सत्य का संकुचन हो रहा है तो आज के समय में राम और रामायण पहले से भी ज़्यादा प्रासंगिक हो गए हैं . आज जिस प्रकार भ्रष्टाचार , हिंसा , लोभ और स्वार्थ रूपी अनगिनत रावण अपने साम्राज्य का विस्तार कर रहे हैं , उसे रोकने के लिए एक नहीं असंख्य रामोम की आवश्यकता है . और यह राम किसी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के घरों से नहीं , हमारे-आपके बीच से ही आएंगे , क्योंकि लोकतंत्र में आम जनता ही असली शासक होती है और भगवान सदा राजा के ही घर उत्पन्न हुए हैं और मुझे नहीं लगता कि भगवान अपनी इस पुरातन आदत को बदलना चाहेंगे . आज हम मेम से हर किसी में एक राम और एक रावण छुपा बैठा है और यह हम पर है कि हम किस को उभार कर उसकी तरह बनना चाहते हैं .
तो आइए , इस रामनवमी को हम सभी यह प्रण लें कि हम भी एक राम बन भारत से व संपूर्ण विश्व से रावणों का सर्वनाश कर एक रामराज्य के निर्माण में अपना योगदान देंगे .